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Nature


हम ब्रह्म क्रिया करने जा रहे हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में की जाने वाली यौगिक क्रिया को ब्रह्म क्रिया कहते हैं। सुबह-सुबह जब बिस्तर से उठ रहे होते हैं तब हमारा शरीर ससुप्ता अवस्था में होता है, इस समय शरीर की क्रियाएँ शिथिल होती है, दिल की धड़कन का कम होती है, रक्त संचार भी मंद होता है, मस्तिष्क का शरीर पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रहता है, माँसपेशियों के शिथिल होने के कारण शरीर के जोड़ों पर पकड़ नहीं रहती है। इस अवस्था से पूर्ण चेतन अवस्था में आने में लगभग 30 मिनट का समय लगता है।


Brahm Kriya: Part-1

मुख्य बिंदु
(१) हम अपने बेड पर बैठे हैं (२) पैर जमीन पर टिका हुआ है (३) कमर बिल्कुल सीधी है (१) पहली क्रिया ( अवधि - 50 सेकंड ) 25-25 सेकंड के दो भाग
भाग 1( 5 सेकंड के 5 राउंड )
* दोनों हाथ घुटने के ऊपर * कमर बिल्कुल सीधी *लंबी गहरी श्वास भरते हुए अपने पैरों को उठाएं तथा पंजों को अंदर की ओर खींचे तथा दोनों हाथों से घुटने को दबाएंगे द्वंद करेंगे (ध्यान रहे कि दाहिना पैर उठाते वक्त दाहिना हाथ नीचे रहेगा) *पंजे को अंदर की ओर खींचे कमर सीधी रहेगी 3 सेकेंड के लिए रोक के रखना है। * समय विभाजन (1 सेकंड ) लंबी गहरी सांस लेते हुए पैर को उठाएं (3 सेकंड ) पैर को उठाकर पंजे को अंदर की ओर खींचते हुए होल्ड करें (1 सेकंड ) सांस छोड़ते हुए पैर को वापस नीचे लाएं *5 सेकंड की इस क्रिया को दाहिने पैर से 5 बार दोहराना है । यह है आपकी 25 सेकंड की क्रिया भाग 2
भाग 1 में की गई क्रिया को अब बाएं पैर से करें ( ध्यान रहे कि बाया पैर उठाते वक्त बाया हाथ नीचे रहेगा) * 5 सेकंड की इस क्रिया को बाएं पैर से 5 बार करें यह है आपकी 25 सेकंड की क्रिया * इस प्रकार भाग 1 और भाग 2 मिलाकर 50 सेकंड की क्रिया समाप्त हुई।

Brahm Kriya: Part-2

दूसरी क्रिया ( अवधि 30 सेकंड )
*अपने दोनों हाथों को नाभि व छाती के बीच के स्थान पर जोड़ कर रखें। *हमारे शरीर के सभी एक्यूप्रेशर पॉइंटस हमारी हथेलियों में होते हैं। *जब हम हथेलियों को मलते हैं तो सभी पॉइंट्स जागृत हो जाते हैं तथा एक्टिव हो जाते हैं और हमारी ऊर्जा का प्रवाह तीव्र हो जाता है इसलिए हमें हथेलियों के द्वारा आंखों के माध्यम से उस ऊर्जा को अपने पूरे शरीर में उतारना है। *हमें दोनों हाथों को तीव्रता से 30 सेकंड के लिए मलना है ( ध्यान रहे कि हाथों को मलते समय हमारी स्पीड कम ना हो )

Brahm Kriya: Part-3

तीसरी क्रिया ( अवधि 30 सेकंड )
*30 सेकंड तक हाथों को अच्छे से मलने के बाद हथेलियों को कुछ सेकंड आंखों के ऊपर रखना है फिर चेहरे की मसाज करते हुए कानों को दबाना है, कमर हमेशा सीधी ही रहेगी फिर नेक को मले, साइड नेक को मले, कंठ को मले, पाम के बैक को मले हमारे शरीर के बैक साइड के पॉइंट हमारे पाम के बैक में होते हैं, उसके बाद हमें अपनी कलाइयों को मलना है सभी उंगलियां मिलाकर उंगलियों के ऊपरी हिस्से को मलना है जहां नाखून होते हैं यह क्रिया हमारे बालों के लिए बहुत अच्छी है इस क्रिया के दौरान सांस सामान्य रहेगी।

Brahm Kriya: Part-4

चौथी क्रिया- श्वासन क्रिया ( 7 सेकंड के 10 राउंड ) नोट:- कृपया ध्यान दें! यह भस्त्रिका प्राणायाम नहीं है और ना ही आपकी परिचित कोई अन्य क्रिया है। * दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर ऊपर की ओर दोनों कंधों के समानांतर रखना है। * सांस पूरी ताकत से लंबा व गहरा लेना है। * सांस भरते समय मुट्ठी खुली रहेगी। * सांस भरने के बाद 2 सेकंड तक होल्ड करें। * इस क्रिया में सांस नाक द्वारा छींकते हुए छोड़ना है। * सांस छोड़ते समय मुट्ठी को एकदम टाइट बंद कर लें। * सांस छोड़ने के बाद 3 सेकंड उसी अवस्था में रुकना है। समय विभाजन ( 1.5 सेकंड ) में सांस लेना है (2 सेकंड ) सांस भरने के बाद होल्ड करना है ( 0.5 सेकंड ) में सांस छोड़ना है ( 3 सेकंड ) सांस छोड़ने के बाद या कहें नाक से छिकने के बाद रुकना है । इस प्रकार से इस क्रिया का एक राउंड 7 सेकंड का हुआ । हमें इसी तरह से इस क्रिया को 10 बार दोहराना है। इस क्रिया की कुल अवधि 70 सेकंड है।

हम सबसे बड़ी भूल क्या करते हैं कि इसी अवस्था में सुबह की सारी क्रियाएँ सम्पन्न करते हैं जिससे की शरीर पर इस अवस्था का बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है। आप ने यदि कभी ध्यान दिया होगा तो आप को यह ज़रूर याद होगा कि सुबह जब आप उठते हैं और बेड से ज़मीन पर पैर रख कर खड़े होते हैं तो आप के शरीर का पूरा भार घुटने पर होता है, और इसी अवस्था में जब आप बाथरूम जाते हैं तो शरीर में संतुलन भी नहीं रहता है, आप ने यदि ध्यान दिया हो तो बहुत अच्छी बात नहीं तो ध्यान ज़रूर देना। इस 30 मिनट की अवस्था में बिना पूर्ण चेतन हुए यदि अपनी शारीरिक गतिविधियाँ करते है तो आप को क्या-क्या शारीरिक हानि हो सकती है- 01. घुटना ख़राब होना 02. माँसपेशियों का ढीला होना 03. जोड़ो घिसना 04. जोड़ कमज़ोर होना 05. जोड़ों का दर्द होना 06. मन स्थिर ना होना 07. शरीर की आंतरिक सफ़ाई का ना होना 08. सम्मरण शक्ति का विकास रुक जाना 09. ध्यान न लगना 10. रक्त-संचार का प्रवाह मंद हो जाना 11. हृदय कमज़ोर होना 12. फेफड़ा कमज़ोर होना 13. विषाक्त द्रव्यों की सफ़ाई ना होना 14. स्मरणशक्ति कमज़ोर होना 15. रोगप्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होना शारीरिक व मानसिक नुक़सान ना हो उससे बचने के लिए आइये जानते हैं कि हम इस अवस्था से पूर्ण अवस्था में कैसे आयें- इस अवस्था से पूर्ण अवस्था में आने के लिए हमें करना है ब्रह्म क्रिया का प्रयोग-